नैनीताल

वन विभाग के लिए सिर दर्द बने गुलदार, नैनीताल के कालाढूंगी में घर से बच्चे को उठाकर ले गया

मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक समीर सिंह का कहना है कि गुलदारों की बढ़ती संख्या बेहद चिंता का विषय है. खेत में छिपकर गुलदार मौके की तलाश करते हैं. अंधेरा होते ही बच्चों पर धावा बोल देते हैं.

 उत्तराखंड में गुलदार वन विभाग के लिए सिर दर्द बन गए हैं. पिछले एक हफ्ते में दो बच्चों को गुलदार निवाला बना चुका है. आज सुबह एक बार फिर नैनीताल के कालाढूंगी में गुलदार का आतंक देखने को मिला. घर में खेलते छह वर्षीय बच्चे को गुलदार उठाकर ले गया. एक अनुमान के अनुसार उत्तराखंड में गुलदारों की संख्या 4000 से ज्यादा पहुंच चुकी है. ऐसे में गुलदारों की बढ़ती संख्या लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गई है. जंगल से निकलकर गुलदार रिहाइशी इलाकों में दस्तक दे रहे हैं. जंगलों में बाघों और गुलदारों के वर्चस्व की लड़ाई भयानक रूप ले लेती है. वर्चस्व की लड़ाई में गुलदार हार जाते हैं. जंगलों से निकलकर रिहाइशी बस्तियों में गुलदार का आना इंसानों के लिए खतरा पैदा हो गया है.

वन विभाग के लिए सिर दर्द बने गुलदार

मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक समीर सिंह बेहद चिंता का विषय मानते हैं. उनका कहना है कि लोगों को गुलदारों के हमलों से बचाने के लिए वन विभाग की टीम मुस्तैद रहती है. हालांकि वन विभाग के पास गुलदार की संख्या का मुकम्मल आंकड़ा नहीं है. ज्यादातर इंसानी बस्तियों के पास गुलदारों ने ठिकाना बना रखा है. खेत में आसानी से खुद को छिपा लेते हैं और अंधेरा होते ही छोटे-छोटे जानवरों का शिकार करते हैं.

आतंक के साये में जीने को मजबूर लोग

कुत्ते, बिल्ली, मुर्गी, गाय के बछड़े और बकरी के चक्कर में इंसानी बस्तियों के पास गुलदार शिकार करने आते हैं. इसी बीच इंसानों पर भी हमला करने से गुरेज नहीं करते और छोटे बच्चों को उठा ले जाते हैं. ऐसी घटना एक हफ्ते के अंतराल में दो बार हो चुकी है. गुलदारों के आतंक से लोग बाहर निकलने में डरने लगे हैं. गुलदारों की बढ़ती संख्या पर वन विभाग ने शोध करने की बात कही है. फिलहाल उत्तराखंड के लोगों को गुलदारों की दहशत में जीने को मजबूर रहना पड़ेगा.

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