उत्तराखंड

उत्तराखंड में अवैध खनन पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार ने लिया बड़ा फैसला, तीन गुना बढ़ेगी आय

 विपक्ष लगातार आरोप-प्रत्यारोप लग रहा था कि सरकार नदियों को प्राइवेट करने जा रही है लेकिन उसको लेकर खनन विभाग ने साफ कर दिया है कि वह नदियों को प्राइवेट नहीं करने जा रहे हैं.

उत्तराखंड में अवैध खनन को रोकने के लिए राज्य सरकार ने एक नया तरीका अपनाया है. उत्तराखंड सरकार अपनी नदियों में होने वाले खनन की रॉयल्टी कलेक्ट करने की जिम्मेदारी अब ठेकेदार को देगी. इससे दो फायदे राज्य सरकार को होंगे, एक तो उत्तराखंड सरकार का राजस्व 3 गुना बढ़ जाएगा और दूसरा अवैध खनन पर सीधे तौर पर लगाम लगेगी. अभी हो रहे अवैध खनन से राज्य सरकार को 3 से 4 गुना का नुकसान पहुंच रहा है, लेकिन अब राज्य सरकार ने इस बात का फैसला लिया है की रॉयल्टी कलेक्शन का काम प्राइवेट लोगों को दे दिया जाए. इससे प्राइवेट व्यक्ति अपनी रॉयल्टी का पूरी तरह से ख्याल रखेगा और एक रॉयल्टी पर एक ही चक्कर नदी से लेने दिया जाएगा.

आपको बता दें कि उत्तराखंड में 4 जिलों में अधिकांश खनन कार्य किया जाता है. जिससे राज्य सरकार को मौजूदा समय में 100 करोड़ का राजस्व प्राप्त होता है, लेकिन इस ई टेंडरिंग के बाद राज्य सरकार को साढ़े 300 करोड़ से लेकर 400 करोड़ तक का राजस्व एक ही साल में प्राप्त हो जाएगा. यह उत्तराखंड की आय को बढ़ाएगा साथ ही अवैध खनन पर भी लगाम लगेगी. खनन विभाग जल्दी यह ई टेंडर करने जा रहा है. इस बारे में खनन उपनिदेशक राजपाल लेघा ने एबीपी लाइव से बात करते हुए कुछ अहम जानकारी दी है.

उन्होंने बताया कि ‘लोगों तक गलत जानकारियां पहुंचाई जा रही है, विभाग या सरकार किसी भी तरह से नदियों को प्राइवेट नहीं करने जा रही है. नदियों में खनन का काम उसी प्रकार से होता रहेगा, जैसे पहले से होता आया है. तमाम विभाग अपने काम वैसे ही करेंगे जैसे ही करते आए हैं. विभाग अपने कामों को इस तरह से अंजाम देते रहेंगे चाहे वह वन विभाग हो या फिर वन निगम. हमने केवल रॉयल्टी कलेक्शन का काम प्राइवेट करने का फैसला लिया है, इससे किसी को कोई नुकसान नहीं है और साथ ही राज्य सरकार की आय भी तीन गुना बढ़ जाएगी. अभी हमें तमाम नदियों से साल भर में 100 करोड़ का राजस्व प्राप्त होता है लेकिन इस ई टेंडरिंग के बाद हमें एक ही बार में 350 करोड़ से 400 करोड़ रुपए राजस्व प्राप्त होगा, साथ ही अवैध खनन पर भी लगाम लगेगी क्योंकि अभी मौजूदा समय में एक रॉयल्टी काट कर 3 से 4 चक्कर लोग करते थे. जिससे सीधे तौर पर राजस्व की हानि होती थी. लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा यह प्रक्रिया पूरी तरह से कानूनी रूप से माननीय है हमने इसका ई टेंडर निकला है.

आपको बता दें इसको लेकर विपक्ष लगातार आरोप-प्रत्यारोप लग रहा था कि सरकार नदियों को प्राइवेट करने जा रही है लेकिन उसको लेकर खनन विभाग ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी प्रकार से नदियों को प्राइवेट नहीं करने जा रहे हैं. अवैध खनन रोकने और राजस्व बढ़ाने के लिए यह फैसला लिया गया है. आपको बता दें उत्तराखंड में सालाना 200 से 300 करोड़ का अवैध खनन किया जाता है. अब इसको पूरी तरह से लीगल करने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है. इसी क्रम में इस ई टेंडरिंग प्रक्रिया को अपनाया गया है.

फिलहाल राज्य सरकार अवैध खनन पर लगाम लगाने के लिए इस प्रकार के नए फैसले ले रही है ताकि राजस्व बढ़ाया जा सके और अवैध खनन करने वालों पर लगाम लग सके. जल्दी भविष्य में और भी बड़े फैसले सामने आ सकते हैं जिससे अवैध खनन पर तो लगाम लगेगी साथ ही आम जनता को फायदा पहुंचेगा और राजस्व की भी बढ़ोतरी होगी. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि किसी भी हाल में अवैध खनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अवैध खनन सीधे तौर पर राजस्व की हानि है और इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.

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