ईरान-अमेरिका के बीच डील का क्रेडिट लेने वाले पाकिस्तान की किरकिरी, जेडी वेंस बोले- ‘MoU जारी करने में देरी इसलिए क्योंकि….’
ईरान-अमेरिका के बीच डील का क्रेडिट लेने वाले पाकिस्तान की किरकिरी, जेडी वेंस बोले- 'MoU जारी करने में देरी इसलिए क्योंकि....'

अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते को लेकर पाकिस्तान एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह उसकी तारीफ नहीं बल्कि आलोचना है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक पॉडकास्ट में कहा कि अमेरिका-ईरान समझौते (MoU) का पूरा विवरण जारी करने में देरी की एक वजह पाकिस्तान और कतर में प्रेस की स्वतंत्रता का स्तर भी था. उनके इस बयान ने पाकिस्तान की मीडिया आजादी और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.
जेडी वेंस ने क्या कहा?
‘Interesting Times with Ross Douthat’ पॉडकास्ट में जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका समझौते का पूरा टेक्स्ट जल्द जारी करना चाहता था, लेकिन पाकिस्तान और कतर की व्यवस्था में अमेरिका जैसे प्रेस की आजादी के नियम नहीं हैं. उन्होंने कहा कि वहां यह उम्मीद नहीं की जाती कि जनता किसी समझौते के दस्तावेज को पढ़े, उसकी जांच करे और खुद उसका विश्लेषण करे.
क्या है अमेरिका का फर्स्ट अमेंडमेंट?
वेंस ने कहा कि अमेरिकी संविधान का पहला संशोधन नागरिकों को अभिव्यक्ति की आजादी, प्रेस की स्वतंत्रता और धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी देता है. पाकिस्तान में इस तरह की संवैधानिक सुरक्षा नहीं है, इसलिए वहां पारदर्शिता का स्तर अलग है.
दो दिन बाद जारी हुआ समझौते का पूरा टेक्स्ट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 15 जून को अमेरिका-ईरान अंतरिम शांति समझौते का ऐलान किया था, लेकिन उसका पूरा दस्तावेज दो दिन बाद जारी किया गया. इस देरी पर डेमोक्रेट नेताओं और कई विशेषज्ञों ने सवाल उठाए थे. कुछ लोगों का मानना था कि ईरान को बड़ी रियायतें दिए जाने की वजह से समझौते का विवरण रोका जा रहा है.
प्रेस फ्रीडम को लेकर पाकिस्तान पर सवाल
जेडी वेंस की टिप्पणी के बाद पाकिस्तान में प्रेस की आजादी का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है. वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में पाकिस्तान 180 देशों में 153वें स्थान पर है. पत्रकारों के लिए पाकिस्तान लंबे समय से चुनौतीपूर्ण देशों में गिना जाता है और 2025 में पारित 27वें संवैधानिक संशोधन के बाद प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं.
स्विट्जरलैंड में साइनिंग सेरेमनी का दावा भी निकला गलत
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया था कि अमेरिका-ईरान समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह होगा. हालांकि बाद में डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने डिजिटल माध्यम से समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए. इसके बाद ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी साफ कर दिया कि स्विट्जरलैंड में कोई समारोह नहीं होगा. इसके बाद शहबाज शरीफ ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट से स्विट्जरलैंड वाले हिस्से को हटा दिया और अपना दौरा भी रद्द कर दिया.
ईरान के यूरेनियम भंडार पर भी बनी सहमति
पॉडकास्ट में जेडी वेंस ने बताया कि 14 बिंदुओं वाले समझौते के तहत ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम को कम करने पर सहमत हुआ है. इसके बदले उसे आर्थिक राहत मिलेगी. वेंस ने कहा कि यह ट्रंप प्रशासन की बड़ी उपलब्धि है क्योंकि ओबामा सरकार के 2015 के समझौते में ईरान को यूरेनियम का भंडार रखने की अनुमति थी, जबकि नए समझौते में उसे खत्म करने की बात कही गई है.



