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ईरान-अमेरिका वार्ता में बड़ा फैसला, विवाद सुलझाने बनीं 4 कमेटियां, कतर-पाक ने जारी किया प्लान

US-Iran Deal Talk: अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में बातचीत जारी है. पहले राउंड की वार्ता के बाद कतर-पाकिस्तान ने दावा किया कि दोनों पक्षों के बीच चार हाईलेवल मीटिंग बनाने पर सहमति बनी है.

ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता को लेकर आयोजित लेक लूसर्न समिट में रविवार (21 जून) को पहले दौर की बातचीत खत्म हो चुकी है. वार्ता के दौरान हाईलेवल कमेटी बनाने पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी है. बैठक खत्म होने के बाद कतर और पाकिस्तान ने साझा बयान जारी कर चार प्रमुख कमेटी के गठन का दावा किया. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साझा बयान को स्वीकृति दी.

लेक लुसर्न (ल्यूसर्न) समिट; बनेंगी चार कमेटियां

1. हाई लेवल कमेटी–  इस कमेटी का राजनीतिक स्वरूप होगा. वार्ता पर नजर रखेगी. मुख्य वार्ताकार इस कमेटी को रिपोर्ट करेंगे.

2. लीड वर्किंग ग्रुप्स– ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर ये ग्रुप काम करेंगे. (अलग-अलग ग्रुप होंगे इन अहम मुद्दों के लिए).

3. मॉनिटरिंग एंड डिसप्यूट रेजोलेशन ग्रुप– ये तय करेगी कि एमओयू के मुद्दों को क्रियांवित किया जा रहा है या नहीं.

4. डि-कॉन्फिलेक्शन सेल – लेबनान के लिए.

यूएस-ईरान वार्ता पर क्या बोले अराघची?

ईरान और अमेरिका के बीच एक 14-पॉइंट के समझौते को लेकर बातचीत का पहला दौर खत्म हुआ है. इसके बाद ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोमवार (22 जून) को बताया कि लेबनान में चल रही जंग को रोकने के लिए काफी अच्छी प्रगति हुई है. उन्होंने इस बातचीत को दोनों देशों के बीच की पहली असली परीक्षा कहा है.

अमेरिका-तेहरान के बीच किन मुद्दों पर बनी सहमति?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में अराघची ने साफ किया कि पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता से हुई इस बातचीत के जरिए, ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल एक्सपोर्ट पर से पाबंदी हटा दी गई है, ईरानी पोर्ट की अमेरिकी नाकेबंदी खत्म कर दी गई है, ईरान की कुछ फ्रीज गई संपत्तियों को फ्री कर दिया गया है और ईरान के लिए एक डेवलपमेंट प्लान पर भी चर्चा की गई है.

उन्होंने लिखा, ‘पाकिस्तान और कतर की अथक मध्यस्थता के चलते लेबनान युद्ध को समाप्त करने की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है. तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर छूट दी गई है, नाकेबंदी हटा ली गई है, कुछ जब्त संपत्तियां जारी कर दी गई हैं और ईरान के लिए एक बड़ी पुनर्निर्माण और विकास योजना शुरू की गई है.’

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